भारत शासन अधिनियम 1919 | Bharat Shasan Adhiniyam 1919


भारत शासन अधिनियम 1919 | Montague Chelmsford Reform Hindi


                  

                नमस्कार दोस्तों , आज MPPSC-PRE के unit -6 से सम्बंधित भारत शासन अधिनियम 1919 को Mppsc Material की Team द्वारा पढेंगे | अतः हम इसका विस्तृत अध्ययन करेंगे क्योंकि यह परीक्षा के दृष्टिकोण महत्त्व रखता है | तो चलिए जानते है –  1919 Act in Hindi


         bharat shasan adhiniyam 1919, 1919 act in hindi, mppsc pre polity, mppsc pre unit 6




परिचय -

        

        इस अधनियम को 1919 में बनाया गया , जबकि इसे 1921 में भारत में ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किया गया | इसे मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार के नाम से भी जाना जाता है |

  • मोंटेग्यू – इस अधिनियम के समय यह भारत के राज्य सचिव थे |
  • चेम्सफोर्ड – इस समय यह भारत के वायसराय थे |

नोट – जॉर्ज लोयड इस समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री थे |



भारत शासन अधिनियम 1919 की विशेषताए -


        इस अधिनियम की प्रमुख विशेषताए निम्नलिखित है |


  • राज्यों में केन्द्रीय नियंत्रण कम करने के लिए केंद्र और प्रान्त के विषयों को अलग कर दिया गया |
  • प्रान्त की विधानपरिषद प्रान्त के विषयों पर और केंद्र की विधानपरिषद केन्द्रीय विषयों पर कानून बना सकती थी | प्रांतीय विषयों को पुनः 2 भागो में भागो में विभक्त किया गया है –

    1. हस्तांतरित विषय – इन पर कानून गवर्नर और विधानपरिषद के प्रति उत्तरदायी मंत्रियो बनाते थे |
    2. आरक्षित विषय – इन पर कानून गवर्नर और उसकी कार्यकारी परिषद् के सदस्य (जो की विधानपरिषद के प्रति उत्तरदायी नहीं होते थे ) बनाते थे |
  • शासन की इस दोहरी व्यवस्था को द्वेध शासन व्यवस्था कहा जाता था | परन्तु यह व्यवस्था केवल प्रान्तों के लिए था , केंद्र के लिए नहीं |
  • केंद्र में द्विसदनात्मक व्यवस्था थी | जिसे राज्यपरिषद (राज्यसभा) और केन्द्रीय विधानपरिषद (लोकसभा) कहा जाता था |

  1. राज्य परिषद् – इसमें कुल 60 सदस्य होते थे , जिनमे से 34 सदस्य निर्वाचित होते थे | इनका कार्यकाल 5 वर्षो का होता था |
  2. केन्द्रीय विधानपरिषद – इसमें कुल 144 सदस्य होते थे , जिनमे से 100 सदस्य निर्वाचित होते थे | इनका कार्यकाल 3 वर्षो के लिए होता था |

नोट – दोनों सदनों के अधिकार लगभग समान होते थे परन्तु बजट स्वीकृति केन्द्रीय विधानपरिषद द्वारा दी जाती थी |


  • केन्द्रीय बजट को राज्य के बजट से अलग किया गया | राज्य की विधानसभाए अपने राज्यों के बजट बना सकती थी |
  • ब्रिटेन में भारत के लिए एक उच्चायुक्त कार्यालय का गठन किया गया | भारत के राज्य सचिव के कुछ कार्यो को उच्चायुक्त को सौंपा गया |
  • इस अधिनियम के द्वारा महालेखा परीक्षक को वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था |
  • इसमें भारत के लिए एक लोक सेवा आयोग का प्रावधान किया गया |

नोट – लोक सेवा आयोग के इस प्रावधान के तहत 1923-24 में गठित ली आयोग की सिफारिश पर 1926 में आयोग की स्थापना की गई थी |

  •  इस अधिनियम के तहत वायसराय की कार्यकारी परिषद् में भी परिवर्तन किया गया |

        कार्यकारी परिषद् की संरचना –

  1. कुल सदस्य – 8
  2. प्रथम सदस्य – वायसराय (यह ब्रिटेन का ही व्यक्ति हो सकता था)
  3. द्वितीय सदस्य – कमांडर-इन-चीफ (ब्रिटेन का व्यक्ति)
  4. शेष 6 में से 3 सदस्यों का भारतीय होना अनिवार्य कर दिया गया |

  • 1909 में किये गए सांप्रदायिक आधार को और भी विस्तृत किया गया | सिख, भारतीय ईसाईयों, आंग्ल भारतीयों और यूरोपियो के लिए पृथक निर्वाचन का सिद्धांत किया गया |


कुछ महत्वपूर्ण तथ्य -


  • इस अधिनियम के अनुसार ब्रिटिश कर्मचारियों को वेतन ब्रिटिश राजस्व से प्रदान किया जायेगा |
  • इस कानून के द्वारा पहली बार भारत में महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया गया |
  • इस अधिनियम में पहली बार उत्तरदायी शासन की बात कही गई |
  • इस अधिनियम द्वारा पहली बार प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को अपनाया गया |
  • इसमें प्रावधान किया गया कि 10 वर्ष पश्चात् एक आयोग का गठन किया जायेगा , जिसका कार्य 1919 के भारत शासन अधिनियम की समीक्षा करना होगा | इसी कारण 1927 में साइमन आयोग का गठन किया गया था |
  • सन 1926 और 1945 के केंदीय विधानसभा चुनाव 1919 के भारत शासन अधिनियम के अनुसार किये गए थे |

 आशा करता हूँ कि  भारत शासन अधिनियम 1919 | Montague Chelmsford Reform Hindi पूरी तरह समझ आ गया होगा | किसी भी प्रकार की समस्या होने पर आप हमें Comment Box में बता सकते है | हमारी Team द्वारा आपकी समस्या को निवारण करने का पूर्ण प्रयास किया जायेगा | आपको यह Post कैसी लगी , अपना फीडबैक Comment में जरुर देवें और इसे अपने दोस्तों को जरुर share करें |


इन्हें भी पढ़े - 







कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

पोस्ट को ध्यान से पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद् | आप अपनी प्रतिक्रिया यहाँ दे सकते है |